
ये एक ऐसा सवाल जो लगातार पूछा भी जाता है और लगातार जेहन में भी आता है कि दुनिया के सात सबसे समृद्ध देशों के संगठन यानि G7 में पिछले कुछ सालों से भारत को लगातार आमंत्रित अतिथि के तौर पर बुलाया जाने लगा है लेकिन दुनिया की दूसरी आर्थिक महाशक्ति बन चुके चीन को नहीं. आखिर वजह क्या है.
चीन का मामला G7 में सबसे दिलचस्प और राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषयों में एक है. चीन G7 का सदस्य नहीं है. उसे अतिथि के रूप में 2009 में बुलाया गया था. ये खबरें रही हैं कि इस साल फ्रांस उसे अतिथि देश के तौर पर बुलाना चाहता था लेकिन जापान के विरोध से ऐसा नहीं कर पाया. हालांकि चीन को जी7 में नहीं बुलाये जाने को विश्लेषक “बिना ब्राज़ील के विश्व कप” या “बिना चैंपियन टीम के विश्व कप” जैसा बताते हैं.
चीनी सरकारी मीडिया इसे “नेतृत्व का भ्रम” कहकर आलोचना करता है और कहता है कि यह समूह अपनी समस्याओं के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करता है. इस बार फ्रांस में हो रही जी7 की मीटिंग में भारत, ब्राजील, दक्षिण कोरिया, और केन्या जैसे देशों को आमंत्रित किया गया. भारत 2003 से अब तक 11 बार G7 के आउटरेच सेशंस में शामिल हुआ है. उसे 2019 से हर साल बुलाया जाता रहा है.
