कार्यालय के मुख्य द्वार पर नारेबाजी, आवंटन में भेदभाव और पारदर्शिता पर उठे सवाल।
अध्यक्ष ने कहा- पूर्व की राशि की जानकारी नहीं, सीईओ बोले- सभी अभिलेख उपलब्ध, प्रक्रिया पूरी तरह नियमसम्मत
सोनू चौधरी
सूरजपुर/भैयाथान:– जनपद पंचायत भैयाथान में 15वें वित्त आयोग की राशि के आवंटन को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवाल मंगलवार को खुलकर विरोध के रूप में सामने आ गए। कई निर्वाचित जनपद सदस्यों ने जनपद पंचायत कार्यालय के मुख्य द्वार पर एकत्र होकर जोरदार नारेबाजी की और आरोप लगाया कि 15वें वित्त आयोग के तहत प्राप्त राशि के वितरण में पारदर्शिता नहीं बरती गई। उनका कहना था कि कुछ क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए राशि का आवंटन किया गया, जबकि कई जनपद सदस्यों के क्षेत्रों की अनदेखी कर दी गई।
प्रदर्शन कर रहे सदस्यों ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण विकास के लिए उपलब्ध कराई गई राशि का उपयोग निष्पक्ष और समान रूप से होना चाहिए था, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। उनका आरोप है कि पूर्व में प्राप्त राशि हो या वर्तमान में उपलब्ध निधि, दोनों के वितरण में कई जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया गया, जिसके कारण अनेक गांव विकास कार्यों से वंचित रह गए।
सदस्यों का कहना था कि यदि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होती तो प्रत्येक जनपद सदस्य को उसके क्षेत्र की आवश्यकता के अनुरूप विकास कार्यों की स्वीकृति मिलती। लेकिन कई सदस्यों के प्रस्तावों को नजरअंदाज कर दिया गया, जिससे राशि के वितरण को लेकर संदेह और गहरा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आवंटन समानता के सिद्धांत पर नहीं किया गया।
प्रदर्शन के दौरान जनपद सदस्यों ने पूर्व में प्राप्त 15वें वित्त आयोग की राशि, वर्तमान उपलब्ध राशि, स्वीकृत विकास कार्यों की सूची, खर्च का पूरा विवरण तथा शेष उपलब्ध निधि की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना था कि जब तक सभी अभिलेख जनप्रतिनिधियों के समक्ष नहीं रखे जाएंगे, तब तक पारदर्शिता के दावे पर विश्वास करना कठिन होगा।
जनपद सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से राशि का पुनर्वितरण नहीं किया गया और सभी जनप्रतिनिधियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वे व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल वित्तीय आवंटन का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास और जनता के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है।
जनपद पंचायत अध्यक्ष सुलोचनी पैकरा ने कहा कि उन्हें पूर्व में प्राप्त राशि के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उपलब्ध राशि का कुछ हिस्सा अभी शेष है, जिसका वितरण कार्ययोजना के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राशि के आवंटन की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी से अभिलेख और विवरण मांगे गए हैं, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
वहीं जनपद पंचायत भैयाथान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार गुप्ता ने जनपद सदस्यों के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप और पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपन्न की गई है। उन्होंने दावा किया कि जनपद पंचायत अध्यक्ष को प्रत्येक निर्णय और राशि आवंटन की जानकारी समय-समय पर दी जाती रही है। संबंधित सभी रजिस्टर, अभिलेख और दस्तावेज उपलब्ध हैं, जिनमें स्वीकृत कार्यों एवं राशि वितरण का पूरा विवरण दर्ज है। उन्होंने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि के साथ भेदभाव नहीं किया गया और सभी कार्य निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्वीकृत किए गए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह रही कि जनपद पंचायत अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालन अधिकारी के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास दिखाई दिया। एक ओर अध्यक्ष का कहना है कि उन्हें पूर्व की राशि की जानकारी नहीं है और वर्तमान राशि की विस्तृत जानकारी भी मांगी गई है, वहीं दूसरी ओर मुख्य कार्यपालन अधिकारी का दावा है कि अध्यक्ष को सभी जानकारी पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों ने पूरे मामले को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है।
15वें वित्त आयोग की राशि के आवंटन को लेकर भैयाथान जनपद पंचायत में उत्पन्न यह विवाद अब स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जनपद सदस्यों के आरोप, अध्यक्ष का पक्ष और मुख्य कार्यपालन अधिकारी का जवाब तीन अलग-अलग तस्वीरें पेश कर रहे हैं। अब क्षेत्रवासियों और जनप्रतिनिधियों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाती है या नहीं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी और यदि प्रक्रिया नियमसम्मत रही है तो उसकी सार्वजनिक जानकारी देकर विवाद का समाधान कैसे किया जाएगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल, 15वें वित्त आयोग की राशि का यह मामला भैयाथान जनपद पंचायत में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
