भरदा के दहकापारा और बस्दोहरीपारा में सघन तलाशी, कार्रवाई के बाद कथित कटाई के पूरे तंत्र पर निगाह
मोहन प्रताप सिंह
छत्तीसगढ़ लाइव न्यूज़, सूरजपुर/प्रतापपुर:– जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के जंगलों में अवैध लकड़ी कटाई और तस्करी को लेकर वन विभाग की कार्रवाई से हड़कंप मचा है। जंगलों में साल सहित बेशकीमती लकड़ियों की कटाई और वन भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतों के बीच 5 अक्टूबर को संयुक्त वन टीम ने ग्राम भरदा के दहकापारा और बस्दोहरीपारा में दबिश देकर साल चिरान जब्त की।
जंगल में पहुंची संयुक्त टीम, संदिग्ध ठिकानों की ली तलाशी
उपवनमंडलाधिकारी प्रतापपुर संस्कृति वरले के मार्गदर्शन और वन परिक्षेत्राधिकारी के सहयोग से धरमपुर, प्रतापपुर और खड़गवां क्षेत्र के वन अमले ने संयुक्त रूप से सघन तलाशी अभियान चलाया। टीम ने संदिग्ध स्थानों की जांच करते हुए साल की चिरान बरामद की और उसे जब्त किया। वन विभाग के अनुसार मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।
झारखंड से कटर बुलाने के दावे ने बढ़ाई हलचल
स्थानीय सूत्रों ने दावा किया है कि जंगलों में बड़े पैमाने पर कटाई के लिए पड़ोसी राज्य झारखंड से करीब 20 से 25 कटर बुलाए गए थे। सूत्रों ने क्षेत्र के एक प्रभावशाली भाजपा नेता पर कथित संरक्षण देने का आरोप भी लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इन दावों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
जब्त लकड़ी की मात्रा और कार्रवाई पर उठे सवाल
कार्रवाई के बाद जब्त लकड़ी की वास्तविक मात्रा और कितने लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों का दावा है कि मौके पर अधिक मात्रा में कटी लकड़ी मौजूद थी। ऐसे में जब्ती पंचनामा, प्रकरण पंजीयन, जब्त लकड़ी की मात्रा और आरोपियों की संख्या जैसे आधिकारिक दस्तावेजों से ही कार्रवाई की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
एसडीओ ने कहा, दोषी मिला तो होगी कार्रवाई
उपवनमंडलाधिकारी संस्कृति वरले ने बताया कि अवैध लकड़ी कटाई की सूचना मिलने पर तत्काल टीम को मौके पर भेजा गया। कार्रवाई के दौरान नियमानुसार लकड़ी जब्त की गई और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि मामले की तह तक पहुंचने के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो प्रभावित गांवों और संभावित ठिकानों पर लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं।
अब जांच की दिशा पर टिकी नजर
प्रतापपुर के जंगलों में अवैध कटाई को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब वन विभाग की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। यदि जांच में संगठित तरीके से लकड़ी कटाई और तस्करी की पुष्टि होती है, तो कार्रवाई का दायरा केवल मौके से चिरान जब्त करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कटाई कराने वालों, लकड़ी खरीदने वालों, परिवहन से जुड़े लोगों और अन्य संबंधित भूमिकाओं की भी जांच जरूरी होगी।
लकड़ी से आगे पहुंचेगी जांच या यहीं थम जाएगी कार्रवाई?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कार्रवाई जंगल में मिली लकड़ी और मौके पर मौजूद लोगों तक सीमित रहेगी, या फिर कथित अवैध कटाई के पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क की कड़ियां भी जांच के दायरे में आएंगी? प्रतापपुर के जंगलों में उठे इन सवालों का जवाब अब वन विभाग की आगामी कार्रवाई से ही सामने आएगा।

