भाजपा मंडल अध्यक्ष का नाम सामने आने से सियासी हलचल तेज, लाडली विधायक शकुंतला पोर्ते के क्षेत्र में उठे संरक्षण के सवाल।
मोहन प्रताप सिंह
छत्तीसगढ़ लाइव न्यूज़, सूरजपुर/:– विकासखंड प्रतापपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत नरोला की शासकीय उचित मूल्य दुकान में राशन वितरण की कथित अनियमितताओं ने प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक हलचल भी तेज कर दी है। जांच में 348 क्विंटल चावल के साथ चना और शक्कर के स्टॉक में कथित भारी कमी सामने आने के बाद संबंधित समिति पर कार्रवाई की गई है।
मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष गोविंदपुर का नाम सामने आने से क्षेत्र में कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। प्रतापपुर क्षेत्र की विधायक शकुंतला पोर्ते के विधानसभा क्षेत्र में उनकी ही पार्टी से जुड़े पदाधिकारी के नाम पर सामने आए इस गंभीर मामले ने राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी चर्चाएं तेज कर दी हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका और जिम्मेदारी की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
348 क्विंटल चावल की कथित कमी, समिति पर कार्रवाई
राशन वितरण में गड़बड़ी और पात्र हितग्राहियों को समय पर राशन नहीं मिलने की शिकायत के बाद खाद्य विभाग ने मामले की जांच शुरू की। अधिकारियों के निर्देश पर फूड इंस्पेक्टर शशि जायसवाल ने मौके पर पहुंचकर दुकान में उपलब्ध खाद्यान्न स्टॉक, वितरण पंजी और अन्य दस्तावेजों की जांच की।
जांच के दौरान 348 क्विंटल चावल के साथ चना और शक्कर के स्टॉक में कथित अनियमितता के तथ्य सामने आने के बाद संबंधित समिति/समूह के खिलाफ कार्रवाई की गई। दुकान को निलंबित करते हुए राशन वितरण की वैकल्पिक व्यवस्था फिलहाल धोनधा की शासकीय उचित मूल्य दुकान से संबद्ध कर की गई है, ताकि पात्र हितग्राहियों को राशन मिलने में परेशानी न हो।
जुलाई-अगस्त का राशन नहीं मिला, फर्जी अंगूठे के भी गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि जुलाई और अगस्त माह का राशन कई पात्र हितग्राहियों को नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने जांच अधिकारियों के समक्ष फर्जी तरीके से अंगूठा लगवाकर राशन नहीं देने जैसी गंभीर शिकायतें भी रखी हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गरीब और आदिवासी परिवारों के हिस्से के राशन के साथ कथित तौर पर खेल किया गया। उनका आरोप है कि यदि राशन वितरण व्यवस्था में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो इसकी जांच केवल दुकान संचालन करने वाली समिति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
मामले को लेकर नरोला सहित आसपास के गांवों में आक्रोश है और ग्रामीण जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निष्पक्ष जांच एवं कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
भाजपा मंडल अध्यक्ष का नाम सामने आने से बढ़ी सियासी गर्मी
मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष गोविंदपुर का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित समिति के संचालन में उनकी भूमिका रही है और किसी भी विवाद अथवा शिकायत की स्थिति में वे समिति का बचाव करते रहे हैं।
यहीं से सवाल प्रतापपुर की विधायक शकुंतला पोर्ते तक भी पहुंच रहा है। क्षेत्र में चर्चा है कि क्या विधायक अपनी ही पार्टी से जुड़े पदाधिकारी पर लगे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगी या राजनीतिक संरक्षण को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देंगी?
हालांकि, यह स्पष्ट है कि केवल नाम सामने आने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। जांच में भूमिका और जिम्मेदारी प्रमाणित होने के बाद ही कानूनी कार्रवाई तय होगी।
कलेक्टर का सख्त संदेश, गरीबों का निवाला छीनने वालों को नहीं बख्शेंगे
मामले को लेकर सूरजपुर कलेक्टर रेना जमील ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गरीबों का निवाला छीनने वाले और राशन की हेराफेरी करने वालों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कलेक्टर के अनुसार संबंधित समिति के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रथम नोटिस जारी किया गया है। जवाब प्राप्त होने के बाद नियमानुसार विस्तृत जांच की जाएगी और जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाएगी।
उन्होंने कहा कि मामले में जो भी लोग संयुक्त रूप से जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फूड इंस्पेक्टर बोलीं, जांच जारी, तथ्यों के आधार पर होगी कार्रवाई
फूड इंस्पेक्टर शशि जायसवाल ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों के निर्देश पर संबंधित समिति के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई है। जांच अभी जारी है और स्टॉक, वितरण व्यवस्था तथा दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब लिया जाएगा। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और जिम्मेदारी के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी तथा आवश्यक होने पर अपराध दर्ज कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल, गरीबों के राशन का जिम्मेदार आखिर कौन?
नरोला राशन मामले में अब पूरे क्षेत्र की नजर जांच की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि 348 क्विंटल चावल सहित चना और शक्कर की कथित कमी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है?
क्या जांच केवल दुकान संचालित करने वाली समिति तक सीमित रहेगी, या फिर समिति के संचालन, निगरानी और कथित राजनीतिक संरक्षण से जुड़े लोगों की भूमिका की भी गहराई से जांच होगी?
प्रतापपुर क्षेत्र की लाडली विधायक शकुंतला पोर्ते के सामने भी अब सवाल खड़ा है, क्या गरीबों के निवाले से जुड़े इतने गंभीर मामले में वह निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करेंगी?
ग्रामीणों की मांग साफ है, जांच निष्पक्ष हो, राशन उठाव और वितरण का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए तथा जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ बिना किसी राजनीतिक दबाव के कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि जांच की अंतिम रिपोर्ट में किन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है और प्रशासन इस कथित घोटाले में कितनी बड़ी कार्रवाई करता है।

