रिविजन याचिका पर जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश ने पलटा निचली अदालत का आदेश, 20 अगस्त तक न्यायिक रिमांड; फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश।
मोहन प्रताप सिंह
छत्तीसगढ़ लाइव न्यूज़, सूरजपुर/:– जिले के प्रतापपुर थाना क्षेत्र के बहुचर्चित हरिनंदन राजवाड़े अपहरण एवं हत्या प्रकरण में गुरुवार को बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया। निचली अदालत से राहत मिलने के बाद बाहर आए 10 आरोपियों को थाना प्रतापपुर पुलिस की कानूनी पहल ने दोबारा जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। जिला अभियोजन अधिकारी के मार्गदर्शन में दायर पुनरीक्षण (रिविजन) याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, प्रतापपुर ने निचली अदालत के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया। इसके बाद सभी आरोपियों को पुनः न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 20 अगस्त 2026 तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने का आदेश पारित किया गया। इस फैसले को प्रकरण की विवेचना में महत्वपूर्ण कानूनी सफलता माना जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, 24 जुलाई 2026 को ग्राम गोंदा निवासी सम्पतिया सूर्यवंशी ने थाना प्रतापपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 23 जुलाई की रात करीब 8:30 बजे हरिनंदन राजवाड़े अपने साथियों राहुल शर्मा और तुषार के साथ उनके घर पहुंचे थे। इसी दौरान रात लगभग 9 बजे ग्राम केंवरा निवासी ललित राजवाड़े, सकल राजवाड़े, चंदन कसेरा सहित अन्य लोग सात मोटरसाइकिलों से वहां पहुंचे। आरोप है कि सभी ने घर में घुसकर हरिनंदन राजवाड़े के साथ गाली-गलौज और मारपीट की तथा जान से मारने की धमकी देते हुए उन्हें जबरन अपने साथ ले गए।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने और उनके पति ने हरिनंदन को बचाने का प्रयास किया, लेकिन आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की। इसके बाद हरिनंदन को मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले जाया गया। घटना की सूचना तत्काल डायल-112 को दी गई। शिकायतकर्ता अपने पति के साथ आरोपियों का पीछा करते हुए ग्राम भैंसामुड़ा के केंवरा चौक पहुंचे, जहां हरिनंदन गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़े मिले।
डायल-112 की सहायता से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद थाना प्रतापपुर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विस्तृत विवेचना प्रारंभ की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल ने आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और साक्ष्य आधारित विवेचना के निर्देश दिए। विवेचना के दौरान शिकायतकर्ता एवं प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए गए, घटनास्थल का निरीक्षण किया गया तथा तकनीकी एवं भौतिक साक्ष्य एकत्र किए गए। पुलिस ने 27 जुलाई 2026 को 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्यपालिक दंडाधिकारी की उपस्थिति में पहचान परेड कराई गई। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की, जिसके आधार पर उनकी निशानदेही से वारदात में प्रयुक्त तीन डंडे और चार मोटरसाइकिल बरामद कर जब्त किए गए।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने न्यायिक रिमांड की मांग करते हुए प्रतापपुर न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन उस समय निचली अदालत ने रिमांड आवेदन निरस्त करते हुए सभी आरोपियों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद पूरे जिले में व्यापक चर्चा और कानूनी बहस शुरू हो गई।
इसके बाद थाना प्रतापपुर पुलिस ने जिला अभियोजन अधिकारी के मार्गदर्शन में उक्त आदेश को चुनौती देते हुए जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, प्रतापपुर के न्यायालय में पुनरीक्षण (रिविजन) याचिका दायर की। न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों और प्रस्तुत तथ्यों का परीक्षण करने के बाद निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया।
न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 6 अगस्त 2026 को थाना प्रतापपुर पुलिस ने सभी 10 आरोपियों को दोबारा न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने सभी आरोपियों को 20 अगस्त 2026 तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने का आदेश पारित किया।
पुलिस का कहना है कि इस बहुचर्चित हत्याकांड में अभी भी फरार अन्य आरोपियों की तलाश लगातार जारी है। संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रकरण की विवेचना पूरी निष्पक्षता, साक्ष्यों और विधिक प्रक्रिया के अनुरूप की जा रही है तथा दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

