*परसिया आंदोलन पर उठे सवालों के तूफान में घिरी जनप्रतिनिधित्व की राजनीति।
*क्या क्षेत्र क्रमांक 04 की विकास निधि दूसरे क्षेत्र में खपाकर अब अपने ही क्षेत्रवासियों को भूख हड़ताल में बैठाया जा रहा?
सोनू कुमार चौधरी /छत्तीसगढ़ लाइव न्यूज़

सूरजपुर/:–* जिले के जनपद पंचायत भैयाथान अंतर्गत ग्राम पंचायत परसिया में सड़क निर्माण की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब महज सड़क के मुद्दे तक सीमित होता नजर नहीं आ रहा है। सोशल मीडिया और वाट्सऐप ग्रुपों में वायरल हो रहे दस्तावेज ने विकास निधि के कथित इस्तेमाल और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सीधे तौर पर यह उठ रहा है कि क्या क्षेत्र क्रमांक 04 की विकास निधि का लाभ क्षेत्र क्रमांक 03 की पंचायत को दिलाने के बाद अब अपने ही क्षेत्र की जनता को सड़क के नाम पर भूख हड़ताल में बैठाकर गुमराह किया जा रहा है?
*वायरल दस्तावेज ने बढ़ाई हलचल, ₹3 लाख के सीसी रोड प्रस्ताव पर सवाल*
वायरल हो रहे लेटरहेड के अनुसार, क्षेत्र क्रमांक 04 की निर्वाचित जनपद सदस्य सविता सिंह के नाम से ग्राम पंचायत करकोटी, जो क्षेत्र क्रमांक 03 के अंतर्गत आती है, में 15वें वित्त आयोग से ₹3 लाख की लागत से सीसी रोड निर्माण के लिए प्रशासकीय स्वीकृति मांगे जाने का उल्लेख है। दस्तावेज सामने आने के बाद सवाल यह है कि आखिर क्षेत्र क्रमांक 04 की निधि का प्रस्ताव क्षेत्र क्रमांक 03 की पंचायत के लिए क्यों तैयार किया गया?
क्या यह प्रस्ताव नियमों के अनुरूप था? किसके निर्देश पर तैयार हुआ? क्या राशि वास्तव में क्षेत्र क्रमांक 04 की विकास निधि से संबंधित थी? और यदि हां, तो अपने क्षेत्र की निधि दूसरे क्षेत्र के कार्य में लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?
*निधि दूसरे क्षेत्र में, फिर अपने क्षेत्र में सड़क के लिए आंदोलन क्यों?*
यही वह बिंदु है जिसने पूरे मामले को राजनीतिक और जनप्रतिनिधित्व की बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। यदि क्षेत्र क्रमांक 04 से जुड़ी विकास निधि का इस्तेमाल किसी दूसरे क्षेत्र की पंचायत में कराया गया है, तो सवाल स्वाभाविक है कि अपने ही क्षेत्र के लोगों के लिए आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता क्यों नहीं मिली?
और इससे भी बड़ा सवाल, जब अपने क्षेत्र की जनता सड़क की समस्या से जूझ रही थी, तब उसी जनता को सड़क निर्माण की मांग को लेकर भूख हड़ताल में बैठने की नौबत क्यों आई?
*क्या आंदोलन के जरिए जनता को दिखाई जा रही है अधूरी तस्वीर?*
सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोपों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि क्षेत्र के विकास कार्यों और निधि के इस्तेमाल को लेकर जनता के सामने पूरी तस्वीर रखी गई या नहीं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि विकास निधि से जुड़े सवालों से ध्यान हटाने के लिए आंदोलन को सड़क की मांग तक सीमित करके प्रस्तुत किया जा रहा है।
यदि यह आरोप सही नहीं है तो फिर संबंधित जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों को सामने आकर वायरल दस्तावेज की वास्तविकता और निधि के इस्तेमाल की स्थिति स्पष्ट करने में क्या परेशानी है?
*जनता पूछ रही, आखिर किसके इशारे पर बना प्रस्ताव?*
परसिया आंदोलन के बीच अब सवाल केवल सड़क का नहीं, बल्कि निधि, प्रस्ताव और जवाबदेही का भी बन गया है। क्षेत्रवासियों के सामने यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्षेत्र क्रमांक 04 की निधि का वास्तविक आवंटन किस कार्य के लिए हुआ, प्रस्ताव किसने तैयार किया, किस स्तर पर अनुमोदन हुआ और राशि का वास्तविक उपयोग कहां किया गया।
यदि राशि दूसरे क्षेत्र के कार्य में स्वीकृत अथवा खर्च हुई है, तो उसकी प्रशासनिक प्रक्रिया क्या थी? क्या संबंधित नियमों का पालन किया गया? इन तमाम सवालों का जवाब सरकारी रिकॉर्ड से ही सामने आ सकता है।
*दस्तावेज सही या गलत, जांच से खुलेगा पूरा राज*
हालांकि वायरल दस्तावेज की प्रमाणिकता, उसमें दर्ज प्रस्ताव की वास्तविक स्थिति, राशि की स्वीकृति और संबंधित निर्माण कार्य के संबंध में आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। इसलिए दस्तावेज और उससे जुड़े आरोपों की अंतिम सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
लेकिन सवाल यह है कि जब दस्तावेज सार्वजनिक होकर चर्चा में आ चुका है, तो संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता?
निधि का स्रोत, प्रस्ताव की प्रक्रिया, प्रशासकीय स्वीकृति, राशि जारी होने और निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति की जांच होने पर ही स्पष्ट होगा कि मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप है या फिर विकास निधि के इस्तेमाल में वास्तव में कोई गंभीर गड़बड़ी हुई है।
*भूख हड़ताल बनाम विकास निधि, जनता किसे माने सच?*
एक तरफ सड़क की मांग को लेकर भूख हड़ताल का आंदोलन है, तो दूसरी तरफ विकास निधि के कथित इस्तेमाल को लेकर उठते सवाल। ऐसे में जनता के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि वास्तविकता क्या है?
क्या सड़क की समस्या वास्तव में इतनी गंभीर है कि जनता को भूख हड़ताल पर बैठना पड़ा? यदि हां, तो संबंधित क्षेत्र की विकास निधि का उपयोग किस कार्य में हुआ? और यदि क्षेत्र की निधि दूसरे क्षेत्र में उपयोग हुई, तो उस निर्णय की जवाबदेही कौन लेगा?
अब जनता मांग रही जवाब, जांच हो और सामने आए पूरी तस्वीर

परसिया आंदोलन को लेकर अब आरोपों और दावों से आगे बढ़कर निष्पक्ष जांच की जरूरत दिखाई दे रही है। वायरल पत्र की सत्यता से लेकर निधि के स्रोत, प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया, प्रशासकीय स्वीकृति, राशि के आवंटन और संबंधित निर्माण कार्य तक की जांच होनी चाहिए।
जनता का सवाल बेहद सीधा है, क्षेत्र क्रमांक 04 की निधि आखिर कहां खर्च हुई? किसके प्रस्ताव पर खर्च हुई? किस पंचायत को इसका लाभ मिला? और यदि क्षेत्र की निधि दूसरे क्षेत्र में गई, तो फिर उसी क्षेत्र की जनता को सड़क के लिए भूख हड़ताल में बैठने की जरूरत क्यों पड़ी?
अब गेंद प्रशासन के पाले में है। दस्तावेजों की जांच हो, सरकारी रिकॉर्ड सार्वजनिक हो और दूध का दूध-पानी का पानी हो, तभी तय होगा कि परसिया आंदोलन विकास की वास्तविक लड़ाई है या विकास निधि और जनप्रतिनिधित्व से जुड़े सवालों से घिरा एक ऐसा विवाद, जिसका जवाब जनता लंबे समय से तलाश रही है।
