नाबालींगो के हाथों में वाहन, हादसों को न्योता*
स्कूल जाने की उम्र में सड़कों पर फर्राटा—न लाइसेंस, न पर्याप्त अनुभव, कुछ दिन पहले हादसे में किशोरी की मौत के बाद भी नहीं थमा सिलसिला।
सोनू कुमार चौधरी /छत्तीसगढ़ लाइव न्यूज़

सूरजपुर/:–* क्षेत्र में नाबालिगों द्वारा दोपहिया वाहन चलाने का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। खासकर स्कूली बच्चे बड़ी संख्या में सड़कों पर वाहन दौड़ाते नजर आ रहे हैं। बिना पर्याप्त अनुभव और वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने वाले ये नाबालिग खुद के साथ-साथ सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों की जिंदगी भी खतरे में डाल रहे हैं।
दर्दनाक हादसा बना चेतावनी, फिर भी नहीं जागी व्यवस्था?
कुछ दिन पहले नाबालिग लड़कियों के वाहन चलाने के दौरान हुए सड़क हादसे ने क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। दुर्घटना में एक किशोरी की मौत हो गई, जबकि दूसरी किशोरी, जो वाहन चला रही थी, गंभीर रूप से घायल हुई और उसका हाथ कट गया। इतना बड़ा हादसा सामने आने के बाद भी नाबालिगों के वाहन चलाने पर प्रभावी रोक नहीं लग पाना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
आईजी के सख्त निर्देश, 25 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान, फिर सड़कों पर बेखौफ नाबालिग कौन?
सरगुजा संभाग में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले नाबालिगों के खिलाफ सख्ती के निर्देश दिए गए हैं। नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के मामलों में 25 हजार रुपये तक के जुर्माने की कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है। इसके बावजूद जरही क्षेत्र की सड़कों पर नाबालिग चालक बेखौफ वाहन चलाते नजर आ रहे हैं।
अब सवाल यह है कि आईजी के सख्त निर्देशों के बाद पुलिस प्रशासन इन नाबालिग चालकों पर कितनी सख्ती दिखाता है? इससे पहले कई अभिभावकों को पुलिस द्वारा समझाइश देकर छोड़ दिया गया, लेकिन इस बार सख्त निर्देशों के बाद कार्रवाई का इंतजार है।
वाहन बच्चों को सौंप रहे अभिभावक भी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते
नाबालिगों को वाहन उपलब्ध कराने में अभिभावकों की जिम्मेदारी भी बेहद महत्वपूर्ण है। बच्चों को वाहन की चाबी सौंपने से पहले अभिभावकों को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति गंभीर होना होगा। क्योंकि लापरवाही की एक छोटी सी चूक किसी परिवार से उसकी खुशियां छीन सकती है।
हादसे के बाद भी अगर नहीं थमा सिलसिला, तो अगला हादसा रोकने की जिम्मेदारी किसकी?
क्षेत्र में लगातार बढ़ते नाबालिग वाहन चालकों के मामले अब केवल यातायात नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं, बल्कि सीधे तौर पर सड़क सुरक्षा और लोगों की जिंदगी से जुड़ा गंभीर सवाल बनते जा रहे हैं। जरूरत है कि पुलिस प्रशासन केवल समझाइश तक सीमित न रहे, बल्कि नियमों के अनुसार प्रभावी कार्रवाई कर नाबालिगों के वाहन चलाने पर रोक लगाए।
